सीओ देंगे रजिस्ट्री से 10 दिन पहले जमीन की पूरी ‘कुंडली’
बिहार में जमीन की खरीद-बिक्री में होने वाली धोखाधड़ी और जालसाजी पर लगाम लगाने के लिए सरकार एक बड़ा बदलाव करने जा रही है। 15 मई से लागू होने वाले इस नये नियम के तहत, अब कोई भी व्यक्ति जमीन खरीदने से पहले उसकी असली स्थिति जान सकेगा।
आवेदक की मांग पर संबंधित अंचल अधिकारी (सीओ) या राजस्व अधिकारी को महज 10 दिनों के भीतर जमीन का पूरा इतिहास और वर्तमान स्टेटस बताना होगा। इससे न केवल खरीदार सुरक्षित होंगे, बल्कि सालों-साल चलने वाले अदालती विवादों पर भी रोक लगेगी।
📡 हाईटेक होगी जांच: अब सैटेलाइट से होगी नजर
सिर्फ कागजों पर ही नहीं, बल्कि जमीन की असलियत जांचने के लिए सरकार जीआईएस तकनीक (सैटेलाइट मैपिंग) और स्थल निरीक्षण (मौके पर जाकर जांच) को भी अनिवार्य कर रही है।
निबंधन के दौरान कई बार लोग जमीन की गलत श्रेणी (जैसे कमर्शियल को खेती की जमीन बताकर) या कम क्षेत्रफल दिखाकर सरकार को चूना लगाते हैं। अब रजिस्ट्री से पहले दस्तावेजों की जांच और जमीन का फिजिकल वेरिफिकेशन होगा।
इससे सरकार को उचित राजस्व मिलेगा और खरीदार को सही माप की जमीन।
📋 कैसे मिलेगी जानकारी? समझें पूरा प्रोसेस
इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए खरीदार को निबंधन (रजिस्ट्री) पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा।
आवेदन के दौरान जमीन से जुड़ी 13 तरह की जानकारियां देनी होंगी, जिनमें मुख्य हैं:
- जमीन का खाता और खेसरा नंबर
- कुल रकबा (एरिया) और चौहद्दी
- जमाबंदी की जानकारी
- बेचने वाले (विक्रेता) का पूरा विवरण
- जमीन से जुड़े अन्य जरूरी कागजात
जैसे ही आप पोर्टल पर जानकारी मांगेंगे, निबंधन विभाग का सॉफ्टवेयर सीधे सर्वेयर एवं भूमि सुधार विभाग से संपर्क करेगा।
वहां से यह संदेश संबंधित ब्लॉक के अंचल अधिकारी के पास जायेगा, जिसे 10 दिनों के अंदर ऑनलाइन ही अपनी रिपोर्ट सबमिट करनी होगी।
🎯 तैयारी
अंचल अधिकारियों और राजस्व अधिकारियों को विशेष ट्रेनिंग
मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग इस योजना को अंतिम रूप दे रहा है। सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार ने अपने “सात निश्चय-3” मिशन के तहत यह फैसला लिया है।
सरकार का मकसद रजिस्ट्री की प्रक्रिया को पारदर्शी और जनता के लिए सुविधाजनक बनाना है।
इसके लिए सभी अंचल अधिकारियों और राजस्व अधिकारियों को विशेष ट्रेनिंग भी दी जा रही है ताकि वे समय पर रिपोर्ट दे सकें।
✅ यह होगा फायदा
बिचौलियों और फर्जीवाड़े पर लगेगी लगाम
इस नयी व्यवस्था का सबसे बड़ा असर जमीन माफिया और बिचौलियों पर पड़ेगा।
अब तक खरीदार को पूरी तरह से विक्रेता की बातों पर भरोसा करना पड़ता था, लेकिन अब सरकारी रिकॉर्ड 10 दिन में दूध का दूध और पानी का पानी कर देगा।
अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से राज्य में जमीन विवाद के मामलों में भारी कमी आयेगी और आम जनता का पैसा सुरक्षित रहेगा।

