राजस्व अदालतों के आदेश अब फाइलों में दबे नहीं रहेंगे। राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि वरीय राजस्व न्यायालयों से पारित हर आदेश का पालन सात दिनों के भीतर करना अंचल अधिकारियों के लिए अनिवार्य होगा। आदेश आरसीएमएस पोर्टल पर अपलोड होते ही उसकी घड़ी चल पड़ेगी और तय समय-सीमा में कार्रवाई नहीं होने पर सीधे अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। खास तौर पर सरकारी भूमि और सरकार के हित से जुड़े मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया है।
इस संबंध में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सी.के. अनिल ने सभी अंचल अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। 22 जनवरी को जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि राज्य सरकार ने सात निश्चय-3 (2025–30) को 16 दिसंबर 2025 से लागू किया है। इसके सातवें स्तंभ ‘ईज ऑफ लिविंग’ के तहत नागरिकों को त्वरित, पारदर्शी और बिना अनावश्यक देरी के न्याय देना सरकार की प्राथमिकता है। राजस्व न्यायालयों के आदेशों में लापरवाही इस लक्ष्य के विपरीत मानी जाएगी।
विभाग के संज्ञान में यह बात आई है कि कई अंचलों में अपर समाहर्ता और भूमि सुधार उपसमाहर्ता (डीसीएलआर) के अर्द्ध-न्यायिक आदेशों को जानबूझकर लंबित रखा जा रहा है। यह जानकारी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा और उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के भूमि सुधार जनकल्याण संवाद के दौरान सामने आई। विभाग ने इसे न्यायिक व्यवस्था के लिए गंभीर विषय बताते हुए साफ कहा है कि अंचल अधिकारी प्राथमिक राजस्व न्यायालय के रूप में कार्य करते हैं और विभिन्न अधिनियमों के तहत उन्हें न्यायिक शक्तियां प्राप्त हैं।
पत्र में राजस्व न्यायालयों की पूरी श्रृंखला और जिम्मेदारियों को भी स्पष्ट किया गया है। अंचल अधिकारी के आदेशों के विरुद्ध डीसीएलआर अपीलीय प्राधिकार होते हैं। वहीं, जमाबंदी रद्दीकरण जैसे मामलों की प्रारंभिक सुनवाई अपर समाहर्ता के न्यायालय में होती है। जिला स्तर पर समाहर्ता राजस्व न्यायालय प्रशासन के सर्वोच्च प्राधिकारी हैं और उनके आदेश निचली अदालतों के लिए बाध्यकारी तथा अंतिम माने जाते हैं। इसके ऊपर प्रमंडलीय आयुक्त अपीलीय प्राधिकार होते हैं, जो अपने क्षेत्र में आदेशों के अनुपालन की निगरानी करेंगे।
सरकार ने यह भी तय किया है कि अंचल अधिकारी अपने वरीय न्यायालयों के आदेशों के पालन की प्रमाणिक रिपोर्ट आरसीएमएस पोर्टल के माध्यम से समाहर्ता को भेजेंगे। इससे आदेश और कार्रवाई के बीच की देरी पर सीधी निगरानी संभव हो सकेगी।
उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने दो टूक कहा है कि वरीय राजस्व न्यायालयों के आदेशों की अवहेलना या जानबूझकर की गई देरी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगी। सभी स्तर के राजस्व अधिकारियों को समय-सीमा में आदेशों का पालन करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जैसे ही आदेश आरसीएमएस पोर्टल पर अपलोड होगा, सात दिनों के भीतर उसका अनुपालन अनिवार्य है। सरकारी जमीन और सरकार के हित से जुड़े मामलों में कोताही बरतने वाले अंचल अधिकारियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई तय मानी जाएगी।
सरकार के इस सख्त फैसले के बाद साफ संकेत है कि अब राजस्व न्यायालयों के आदेशों पर अमल में ढिलाई की गुंजाइश नहीं बचेगी और जमीन से जुड़े मामलों में लोगों को समय पर न्याय मिलने की राह आसान होगी।
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